शुभ प्रभात (गुड मॉर्निंग) शायरी
ज़माने से कह दो, तेरे कदमों की आहट मेरे सपनों के आंगन में,
मेरी पहचान बन चुका है, कि इश्क़ का ये खूबसूरत और पावन सफर कभी खत्म न हो।
मेरी पहचान बन चुका है, कि इश्क़ का ये खूबसूरत और पावन सफर कभी खत्म न हो।