ग़ज़ल और नज़्म
मेरे हमदम, तेरे साथ बिताया हर पल मेरी खामोश इबादतों में,
कुछ इस तरह समाया हुआ है, कि तू ही मेरी पहली और आखरी मंजिल बन चुकी है।
तेरी चाहत में हर इम्तिहान से गुज़र जाना है,
तुझे ही अपनी ज़िंदगी का सच्चा मक़सद बनाना है।
कुछ इस तरह समाया हुआ है, कि तू ही मेरी पहली और आखरी मंजिल बन चुकी है।
तेरी चाहत में हर इम्तिहान से गुज़र जाना है,
तुझे ही अपनी ज़िंदगी का सच्चा मक़सद बनाना है।