शुभ रात्रि (गुड नाइट) शायरी
ऐ दोस्त, तेरी चाहत का नशा मेरे सपनों के आंगन में,
खुदा की रहमत बन गया है, कि तेरे मुस्कुराने से ही मेरी ये पूरी कायनात मुकम्मल है। [शुभ रात्रि (गुड नाइट) शायरी 947]
खुदा की रहमत बन गया है, कि तेरे मुस्कुराने से ही मेरी ये पूरी कायनात मुकम्मल है। [शुभ रात्रि (गुड नाइट) शायरी 947]