४ लाइन शायरी (रुबाई)
सदा, तेरी खामोशी का पैगाम मेरी आँखों की पुतलियों में,
दिल को दीवाना बना रहा है, कि तेरी एक हंसी पे हम अपनी जान भी निसार कर दें। [४ लाइन शायरी (रुबाई) 566]
दिल को दीवाना बना रहा है, कि तेरी एक हंसी पे हम अपनी जान भी निसार कर दें। [४ लाइन शायरी (रुबाई) 566]