४ लाइन शायरी (रुबाई)
सुनो, तेरे साथ बिताया हर पल मेरे दिल की धड़कनों में,
इबादत की तरह पावन हो गया है, कि तू ही मेरी पहली और आखरी मंजिल बन चुकी है। [४ लाइन शायरी (रुबाई) 949]
इबादत की तरह पावन हो गया है, कि तू ही मेरी पहली और आखरी मंजिल बन चुकी है। [४ लाइन शायरी (रुबाई) 949]