शुभ रात्रि (गुड नाइट) शायरी
दिल की गहराइयों से, तेरे इश्क का पावन रंग मेरे दिल के हर कोने में,
नया उजाला बिखेर रहा है, कि खुदा से अब कोई और दुआ माँगना बाकी नहीं। [शुभ रात्रि (गुड नाइट) शायरी 861]
नया उजाला बिखेर रहा है, कि खुदा से अब कोई और दुआ माँगना बाकी नहीं। [शुभ रात्रि (गुड नाइट) शायरी 861]