ब्रेकअप शायरी इन हिंदी
खामोशियों के दरमियां, उम्मीदों के टूटने की ये सदा मेरी उदासियों के आलम में,
अंदर ही अंदर जला रहा है, कि खुशियों की तलाश में सिर्फ ग़म ही ग़म हाथ लगे। [ब्रेकअप शायरी इन हिंदी 761]
अंदर ही अंदर जला रहा है, कि खुशियों की तलाश में सिर्फ ग़म ही ग़म हाथ लगे। [ब्रेकअप शायरी इन हिंदी 761]