ब्रेकअप शायरी इन हिंदी
याद रखना, उम्मीदों के टूटने की ये सदा मेरी उदासियों के आलम में,
अंदर ही अंदर जला रहा है, कि यादों के सहारे ही ये कड़वी ज़िंदगी काटनी पड़ी। [ब्रेकअप शायरी इन हिंदी 941]
अंदर ही अंदर जला रहा है, कि यादों के सहारे ही ये कड़वी ज़िंदगी काटनी पड़ी। [ब्रेकअप शायरी इन हिंदी 941]