दर्द भरी और तन्हाई शायरी
अक्सर, छूटे हुए हमसफर की यादें मेरी यादों के खंडहर में,
अंदर ही अंदर जला रहा है, कि खुशियों की तलाश में सिर्फ ग़म ही ग़म हाथ लगे। [दर्द भरी और तन्हाई शायरी 756]
अंदर ही अंदर जला रहा है, कि खुशियों की तलाश में सिर्फ ग़म ही ग़म हाथ लगे। [दर्द भरी और तन्हाई शायरी 756]