दर्द भरी और तन्हाई शायरी
उम्मीदों के टूटने की ये सदा मेरी उदासियों के आलम में,
इस कदर चुभ रहा है हर पल, कि अब रोते हुए भी मुस्कुराना हमारी मजबूरी बन गई।
इस कदर चुभ रहा है हर पल, कि अब रोते हुए भी मुस्कुराना हमारी मजबूरी बन गई।