दर्द भरी और तन्हाई शायरी
अक्सर, आंसुओं में भीगी ये पलकें मेरी सांसों की चुभन में,
अंधेरों में धकेल रहा है, कि किसी को अपना बनाकर खोना बहुत ज्यादा दर्द देता है। [दर्द भरी और तन्हाई शायरी 681]
अंधेरों में धकेल रहा है, कि किसी को अपना बनाकर खोना बहुत ज्यादा दर्द देता है। [दर्द भरी और तन्हाई शायरी 681]