सैड शायरी इन हिंदी
अक्सर, उम्मीदों के टूटने की ये सदा मेरी तन्हाई की महफ़िल में,
उम्र भर का नासूर बन गया है, कि अब किसी पर भी ऐतबार करना नामुमकिन हो गया। [सैड शायरी इन हिंदी 870]
उम्र भर का नासूर बन गया है, कि अब किसी पर भी ऐतबार करना नामुमकिन हो गया। [सैड शायरी इन हिंदी 870]