सैड शायरी इन हिंदी
सुनो, ख्वाबों के उजड़ने का मातम मेरे खामोश आशियाने में,
नासूर बनकर रिस रहा है, कि कांच की तरह टूटकर बिखर गए हमारे सारे अरमान। [सैड शायरी इन हिंदी 959]
नासूर बनकर रिस रहा है, कि कांच की तरह टूटकर बिखर गए हमारे सारे अरमान। [सैड शायरी इन हिंदी 959]