सैड शायरी इन हिंदी
सच है, उम्मीदों के टूटने की ये सदा मेरे सीने के अंदर,
सांसों को भारी कर रहा है, कि अब किसी पर भी ऐतबार करना नामुमकिन हो गया। [सैड शायरी इन हिंदी 710]
सांसों को भारी कर रहा है, कि अब किसी पर भी ऐतबार करना नामुमकिन हो गया। [सैड शायरी इन हिंदी 710]