सैड शायरी इन हिंदी
अक्सर, मोहब्बत में मिले धोखे का नासूर मेरे खामोश आशियाने में,
नासूर बनकर रिस रहा है, कि कांच की तरह टूटकर बिखर गए हमारे सारे अरमान। [सैड शायरी इन हिंदी 695]
नासूर बनकर रिस रहा है, कि कांच की तरह टूटकर बिखर गए हमारे सारे अरमान। [सैड शायरी इन हिंदी 695]