रोमांटिक शायरी
ज़िंदगी के सफर में, तेरी मासूमियत का ये अंदाज़ मेरे सपनों के आंगन में,
खुदा की रहमत बन गया है, कि खुदा से अब कोई और दुआ माँगना बाकी नहीं।
खुदा की रहमत बन गया है, कि खुदा से अब कोई और दुआ माँगना बाकी नहीं।