शुभ रात्रि (गुड नाइट) शायरी
ज़माने से कह दो, तेरी धड़कनों की आवाज़ मेरी ज़िंदगी के सफर में,
हर पल नया रंग भर रहा है, कि अब तेरे इश्क में ही जीना और मरना मंजूर है। [शुभ रात्रि (गुड नाइट) शायरी 178]
हर पल नया रंग भर रहा है, कि अब तेरे इश्क में ही जीना और मरना मंजूर है। [शुभ रात्रि (गुड नाइट) शायरी 178]