शुभ रात्रि (गुड नाइट) शायरी
इश्क़ में, तेरी खामोशी का पैगाम मेरी सूनी रातों में,
मेरी पहचान बन चुका है, कि खुदा से अब कोई और दुआ माँगना बाकी नहीं। [शुभ रात्रि (गुड नाइट) शायरी 609]
मेरी पहचान बन चुका है, कि खुदा से अब कोई और दुआ माँगना बाकी नहीं। [शुभ रात्रि (गुड नाइट) शायरी 609]