दोस्ती शायरी इन हिंदी
ऐ सनम, जिगरी दोस्तों के साथ की ये महफ़िल मुश्किलों के घने अंधेरों में,
हर ग़म को पल भर में भुला रहा है, कि दोस्तों की एक सच्ची हंसी पर सारा जहां कुर्बान है। [दोस्ती शायरी इन हिंदी 658]
हर ग़म को पल भर में भुला रहा है, कि दोस्तों की एक सच्ची हंसी पर सारा जहां कुर्बान है। [दोस्ती शायरी इन हिंदी 658]