ब्रेकअप शायरी इन हिंदी
अक्सर, वक्त की बेदर्द और बेरहम मार मेरी भीगी आँखों में,
कांच की तरह बिखर रहा है, कि अब तन्हाइयों से ही दिल लगाना सीख लिया हमने। [ब्रेकअप शायरी इन हिंदी 924]
कांच की तरह बिखर रहा है, कि अब तन्हाइयों से ही दिल लगाना सीख लिया हमने। [ब्रेकअप शायरी इन हिंदी 924]