ब्रेकअप शायरी इन हिंदी
यकीन मानो, सिसकती हुई सांसों का ये आलम मेरी खामोश रातों में,
उम्र भर का नासूर बन गया है, कि अब किसी पर भी ऐतबार करना नामुमकिन हो गया।
उम्र भर का नासूर बन गया है, कि अब किसी पर भी ऐतबार करना नामुमकिन हो गया।