बेवफ़ा और बिछड़ने की शायरी
मेरे हमदम, वक्त की बेदर्द और बेरहम मार मेरी भीगी आँखों में,
खामोशी से रुला रहा है, कि किसी को अपना बनाकर खोना बहुत ज्यादा दर्द देता है। [बेवफ़ा और बिछड़ने की शायरी 789]
खामोशी से रुला रहा है, कि किसी को अपना बनाकर खोना बहुत ज्यादा दर्द देता है। [बेवफ़ा और बिछड़ने की शायरी 789]