बेवफा शायरी इन हिंदी
यूं तो, दिल के अरमानों का ये जनाज़ा मेरी तकदीर के अंधेरों में,
अंदर ही अंदर जला रहा है, कि यादों के सहारे ही ये कड़वी ज़िंदगी काटनी पड़ी। [बेवफा शायरी इन हिंदी 724]
अंदर ही अंदर जला रहा है, कि यादों के सहारे ही ये कड़वी ज़िंदगी काटनी पड़ी। [बेवफा शायरी इन हिंदी 724]