४ लाइन शायरी (रुबाई)
याद रखना, तेरी खूबसूरत सूरत का नूर मेरे दिल के हर कोने में,
चाँद की तरह चमक रहा है, कि खुदा से अब कोई और दुआ माँगना बाकी नहीं। [४ लाइन शायरी (रुबाई) 702]
चाँद की तरह चमक रहा है, कि खुदा से अब कोई और दुआ माँगना बाकी नहीं। [४ लाइन शायरी (रुबाई) 702]