४ लाइन शायरी (रुबाई)
हर घड़ी, तेरी यादों का ये चमन मेरी हर सांस में,
गुलाब की तरह महक रहा है, कि तेरे सिवा अब किसी और की चाहत दिल में नहीं रही। [४ लाइन शायरी (रुबाई) 861]
गुलाब की तरह महक रहा है, कि तेरे सिवा अब किसी और की चाहत दिल में नहीं रही। [४ लाइन शायरी (रुबाई) 861]