ज़िंदगी और हौसला शायरी
हर घड़ी, ज़िंदगी को खुलकर जीने का ये सलीका प्रकृति के हर एक बदलाव में,
अंदर से मजबूत और परिपक्व बना रहा है, कि मुस्कुराते हुए हर हाल में जीना ही सबसे बड़ी ज़िंदगी है। [ज़िंदगी और हौसला शायरी 992]
अंदर से मजबूत और परिपक्व बना रहा है, कि मुस्कुराते हुए हर हाल में जीना ही सबसे बड़ी ज़िंदगी है। [ज़िंदगी और हौसला शायरी 992]