सैड शायरी इन हिंदी
खामोशियों के दरमियां, अधूरे ख्वाबों का ये बिखरा मंज़र मेरी वीरान ज़िंदगी में,
ज़िंदगी को वीरान कर रहा है, कि कांच की तरह टूटकर बिखर गए हमारे सारे अरमान। [सैड शायरी इन हिंदी 807]
ज़िंदगी को वीरान कर रहा है, कि कांच की तरह टूटकर बिखर गए हमारे सारे अरमान। [सैड शायरी इन हिंदी 807]