सैड शायरी इन हिंदी
हर घड़ी, उदासी की ये लंबी शामें मेरे दर्दमंद दिल में,
खामोशी से रुला रहा है, कि दिल के ज़ख्मों को छिपाकर मुस्कुराना ही दस्तूर बन गया। [सैड शायरी इन हिंदी 721]
खामोशी से रुला रहा है, कि दिल के ज़ख्मों को छिपाकर मुस्कुराना ही दस्तूर बन गया। [सैड शायरी इन हिंदी 721]