सैड शायरी इन हिंदी
याद रखना, छूटे हुए हमसफर की यादें मेरी यादों के खंडहर में,
अंदर ही अंदर जला रहा है, कि यादों के सहारे ही ये कड़वी ज़िंदगी काटनी पड़ी। [सैड शायरी इन हिंदी 612]
अंदर ही अंदर जला रहा है, कि यादों के सहारे ही ये कड़वी ज़िंदगी काटनी पड़ी। [सैड शायरी इन हिंदी 612]