सैड शायरी इन हिंदी
यकीन मानो, तन्हाइयों का ये खौफनाक साया मेरी उदासियों के आलम में,
इस कदर चुभ रहा है हर पल, कि अब किसी पर भी ऐतबार करना नामुमकिन हो गया। [सैड शायरी इन हिंदी 838]
इस कदर चुभ रहा है हर पल, कि अब किसी पर भी ऐतबार करना नामुमकिन हो गया। [सैड शायरी इन हिंदी 838]