सैड शायरी इन हिंदी
अक्सर, उम्मीदों के टूटने की ये सदा मेरी उदासियों के आलम में,
इस कदर चुभ रहा है हर पल, कि अब रोते हुए भी मुस्कुराना हमारी मजबूरी बन गई। [सैड शायरी इन हिंदी 970]
इस कदर चुभ रहा है हर पल, कि अब रोते हुए भी मुस्कुराना हमारी मजबूरी बन गई। [सैड शायरी इन हिंदी 970]