सैड शायरी इन हिंदी
बस इतना समझ लो, तन्हाई की काली रातों का सन्नाटा मेरी यादों के खंडहर में,
अंदर ही अंदर जला रहा है, कि यादों के सहारे ही ये कड़वी ज़िंदगी काटनी पड़ी। [सैड शायरी इन हिंदी 924]
अंदर ही अंदर जला रहा है, कि यादों के सहारे ही ये कड़वी ज़िंदगी काटनी पड़ी। [सैड शायरी इन हिंदी 924]