सैड शायरी इन हिंदी
ऐ सनम, जुदाई का ये कड़वा ज़हर मेरे दर्दमंद दिल में,
खामोशी से रुला रहा है, कि दिल के ज़ख्मों को छिपाकर मुस्कुराना ही दस्तूर बन गया। [सैड शायरी इन हिंदी 889]
खामोशी से रुला रहा है, कि दिल के ज़ख्मों को छिपाकर मुस्कुराना ही दस्तूर बन गया। [सैड शायरी इन हिंदी 889]