सैड शायरी इन हिंदी
ऐ सनम, जुदाई का ये कड़वा ज़हर मेरी सांसों की चुभन में,
अंधेरों में धकेल रहा है, कि किसी को अपना बनाकर खोना बहुत ज्यादा दर्द देता है। [सैड शायरी इन हिंदी 789]
अंधेरों में धकेल रहा है, कि किसी को अपना बनाकर खोना बहुत ज्यादा दर्द देता है। [सैड शायरी इन हिंदी 789]