दर्द भरी और तन्हाई शायरी
सुनो, उदासी की ये लंबी शामें मेरी भीगी आँखों में,
आंसुओं का सैलाब ला रहा है, कि दिल के ज़ख्मों को छिपाकर मुस्कुराना ही दस्तूर बन गया। [दर्द भरी और तन्हाई शायरी 845]
आंसुओं का सैलाब ला रहा है, कि दिल के ज़ख्मों को छिपाकर मुस्कुराना ही दस्तूर बन गया। [दर्द भरी और तन्हाई शायरी 845]