दर्द भरी और तन्हाई शायरी
खामोशियों के दरमियां, ख्वाबों के उजड़ने का मातम मेरे खामोश आशियाने में,
नासूर बनकर रिस रहा है, कि अब तन्हाइयों से ही दिल लगाना सीख लिया हमने।
नासूर बनकर रिस रहा है, कि अब तन्हाइयों से ही दिल लगाना सीख लिया हमने।