दर्द भरी और तन्हाई शायरी
दिल की गहराइयों से, छूटे हुए हमसफर की यादें मेरी यादों के खंडहर में,
अंदर ही अंदर जला रहा है, कि यादों के सहारे ही ये कड़वी ज़िंदगी काटनी पड़ी। [दर्द भरी और तन्हाई शायरी 816]
अंदर ही अंदर जला रहा है, कि यादों के सहारे ही ये कड़वी ज़िंदगी काटनी पड़ी। [दर्द भरी और तन्हाई शायरी 816]