दर्द भरी और तन्हाई शायरी
हर घड़ी, खामोश लबों की दबी हुई चीख मेरी यादों के खंडहर में,
अंदर ही अंदर जला रहा है, कि खुशियों की तलाश में सिर्फ ग़म ही ग़म हाथ लगे।
अंदर ही अंदर जला रहा है, कि खुशियों की तलाश में सिर्फ ग़म ही ग़म हाथ लगे।