दर्द भरी और तन्हाई शायरी
दिल की गहराइयों से, अधूरे ख्वाबों का ये बिखरा मंज़र मेरी वीरान ज़िंदगी में,
ज़िंदगी को वीरान कर रहा है, कि कांच की तरह टूटकर बिखर गए हमारे सारे अरमान। [दर्द भरी और तन्हाई शायरी 891]
ज़िंदगी को वीरान कर रहा है, कि कांच की तरह टूटकर बिखर गए हमारे सारे अरमान। [दर्द भरी और तन्हाई शायरी 891]