दर्द भरी और तन्हाई शायरी
सदा, आँखों से बहते अश्कों का दरिया मेरे खामोश आशियाने में,
नासूर बनकर रिस रहा है, कि अब तन्हाइयों से ही दिल लगाना सीख लिया हमने। [दर्द भरी और तन्हाई शायरी 887]
नासूर बनकर रिस रहा है, कि अब तन्हाइयों से ही दिल लगाना सीख लिया हमने। [दर्द भरी और तन्हाई शायरी 887]