दर्द भरी और तन्हाई शायरी
दिल की गहराइयों से, अधूरे ख्वाबों का ये बिखरा मंज़र मेरे खामोश आशियाने में,
नासूर बनकर रिस रहा है, कि अब तन्हाइयों से ही दिल लगाना सीख लिया हमने। [दर्द भरी और तन्हाई शायरी 791]
नासूर बनकर रिस रहा है, कि अब तन्हाइयों से ही दिल लगाना सीख लिया हमने। [दर्द भरी और तन्हाई शायरी 791]