दर्द भरी और तन्हाई शायरी
ऐ सनम, रोते हुए दिल की ये बेबसी मेरे खामोश आशियाने में,
नासूर बनकर रिस रहा है, कि कांच की तरह टूटकर बिखर गए हमारे सारे अरमान। [दर्द भरी और तन्हाई शायरी 875]
नासूर बनकर रिस रहा है, कि कांच की तरह टूटकर बिखर गए हमारे सारे अरमान। [दर्द भरी और तन्हाई शायरी 875]