दर्द भरी और तन्हाई शायरी
यूं तो, दिल के अरमानों का ये जनाज़ा मेरी खामोश रातों में,
चेहरे की मुस्कान छीन रहा है, कि यादों के सहारे ही ये कड़वी ज़िंदगी काटनी पड़ी।
चेहरे की मुस्कान छीन रहा है, कि यादों के सहारे ही ये कड़वी ज़िंदगी काटनी पड़ी।