दर्द भरी और तन्हाई शायरी
ऐ दोस्त, आँखों से बहते अश्कों का दरिया मेरी वीरान ज़िंदगी में,
ज़िंदगी को वीरान कर रहा है, कि अब तन्हाइयों से ही दिल लगाना सीख लिया हमने। [दर्द भरी और तन्हाई शायरी 927]
ज़िंदगी को वीरान कर रहा है, कि अब तन्हाइयों से ही दिल लगाना सीख लिया हमने। [दर्द भरी और तन्हाई शायरी 927]