दर्द भरी और तन्हाई शायरी
हकीकत यही है, तन्हाई की काली रातों का सन्नाटा मेरी खामोश रातों में,
चेहरे की मुस्कान छीन रहा है, कि यादों के सहारे ही ये कड़वी ज़िंदगी काटनी पड़ी। [दर्द भरी और तन्हाई शायरी 688]
चेहरे की मुस्कान छीन रहा है, कि यादों के सहारे ही ये कड़वी ज़िंदगी काटनी पड़ी। [दर्द भरी और तन्हाई शायरी 688]