इश्क़ और मोहब्बत शायरी
ऐ दोस्त, तेरी मासूम आँखों का नूर मेरी ज़िंदगी के सफर में,
अमृत बनकर घुल गया है, कि तेरे सिवा अब किसी और की चाहत दिल में नहीं रही।
अमृत बनकर घुल गया है, कि तेरे सिवा अब किसी और की चाहत दिल में नहीं रही।