शुभ रात्रि (गुड नाइट) शायरी
अक्सर, तेरी सांसों की महक मेरी हर सुबह ओ शाम में,
गुलाब की तरह महक रहा है, कि तेरे सिवा अब किसी और की चाहत दिल में नहीं रही। [शुभ रात्रि (गुड नाइट) शायरी 726]
गुलाब की तरह महक रहा है, कि तेरे सिवा अब किसी और की चाहत दिल में नहीं रही। [शुभ रात्रि (गुड नाइट) शायरी 726]