शुभ रात्रि (गुड नाइट) शायरी
ऐ सनम, तेरी यादों का ये चमन मेरी खामोश इबादतों में,
जादू की तरह असर कर रहा है, कि तू ही मेरी पहली और आखरी मंजिल बन चुकी है। [शुभ रात्रि (गुड नाइट) शायरी 520]
जादू की तरह असर कर रहा है, कि तू ही मेरी पहली और आखरी मंजिल बन चुकी है। [शुभ रात्रि (गुड नाइट) शायरी 520]