शुभ रात्रि (गुड नाइट) शायरी
बस इतना समझ लो, तेरी पाकीज़ा वफ़ा का साया मेरे दिल की धड़कनों में,
कुछ इस तरह समाया हुआ है, कि तेरे सिवा अब किसी और की चाहत दिल में नहीं रही। [शुभ रात्रि (गुड नाइट) शायरी 180]
कुछ इस तरह समाया हुआ है, कि तेरे सिवा अब किसी और की चाहत दिल में नहीं रही। [शुभ रात्रि (गुड नाइट) शायरी 180]