शुभ रात्रि (गुड नाइट) शायरी
मेरे हमदम, तेरे हुस्न का ये दीदार मेरी आँखों की पुतलियों में,
हमेशा के लिए बस गया है, कि खुदा से अब कोई और दुआ माँगना बाकी नहीं। [शुभ रात्रि (गुड नाइट) शायरी 21]
हमेशा के लिए बस गया है, कि खुदा से अब कोई और दुआ माँगना बाकी नहीं। [शुभ रात्रि (गुड नाइट) शायरी 21]